मुख्य पटल प्रवेश

विश्वविद्यालय के विविध आयाम

  • विश्वविद्यालय का शैक्षणिक परिसर जयपुर की ऐतिहासिक खासा कोठी में स्थित है ।
  • दो मंजिलों में फैला यह परिसर कक्षा-कक्षों, कम्प्यूटर लैब, स्टूडियो, पुस्तकालय आदि सभी आवश्यक अकादमिक सुविधाओं से सुसज्जित है ।
  • विश्वविद्यालय का प्रशासनिक परिसर जवाहरलाल नेहरू मार्ग स्थित सर्वेपल्ली राधाकृष्णन शिक्षा संकुल के राजीव गांधी विद्या भवन के दूसरी मंज़िल पर स्थित है ।
  • विश्वविद्यालय के नए परिसर के लिए राज्य सरकार ने अजमेर रोड पर ग्राम दहमी कलां में 30.55 एकड़ का भूखण्ड आवंटित कर दिया है, जिस पर निर्माण कार्य शुरू हो रहा है ।
  • विभागीय इमारतें, कम्प्यूटर लैब, सुसज्जित स्टूडियो, स्मार्ट कक्षा-कक्ष, व्याख्यान कक्ष, पुस्तकालय, वाचनालय, छात्रावास, प्रेक्षागृह, जिम्नेजियम, स्वीमिंग पूल, शॉपिंग एरिया, चिकित्सालय, खेल मैदान, बैंक और एटीएम आदि सभी जरूरतों के लिए निर्माणाधीन परिसर में सुरुचिपूर्ण वास्तुशिल्प के साथ व्यवस्था की गई है ।
  • विश्वविद्यालय में दो संकाय हैं:
    1. पत्रकारिता संकाय
    2. जनसंचार संकाय
  • पत्रकारिता संकाय के अंतर्गत वर्तमान में विश्वविद्यालय के तीन शैक्षणिक विभाग संचालित हैं:
    क. मीडिया अध्ययन विभाग
    ख. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विभाग
    ग. नव मीडिया विभाग
  • जनसंचार संकाय के अंतर्गत वर्तमान में विश्वविद्यालय के दो शैक्षणिक विभाग संचालित हैं:
    क. मीडिया संगठन और जनसम्पर्क विभाग
    ख. विकास संचार विभाग
  • विश्वविद्यालय में संचालित स्नातक एवं स्नातकोत्तर के सभी शैक्षणिक पाठ्य-योजनाओं के पाठ्यक्रम अकादमिक मानकों और व्यावसायिक अपेक्षाओं के अनुरूप निर्मित किए गए हैं ।
  • पाठ्यक्रमों को प्रतिष्ठित विषय-विशेषज्ञों एवं अनुभवी मीडिया विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया गया है ।
  • पाठ्यक्रमों में मीडिया से संबंधित अधुनातन प्रवृत्तियों, रोजगारोन्मुख कौशल, नवाचार के साथ-साथ व्यावसायिक नैतिकता से संबंधित सामग्री को भी शामिल किया गया है ।
  • पाठ्यक्रमों को निरंतर अद्यतन करने की प्रक्रिया भी अपनाई गई है, ताकि विद्यार्थी इनमें दीक्षित होकर सुयोग्य प्रोफ़ेशनल बन पाएँ ।
  • स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेशित सभी विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय में नामांकन की प्रक्रिया पूर्ण करनी होगी ।
  • बिना नामांकन के किसी भी विद्यार्थी को विश्वविद्यालय परीक्षा में प्रविष्ट नहीं होने दिया जाएगा ।
  • किसी अन्य विश्वविद्यालय या बोर्ड से अर्हकारी परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थी नामांकन आवेदन के साथ प्रव्रजन प्रमाण-पत्र की मूलप्रति और अर्हकारी परीक्षा उत्तीर्ण अंकतालिका की प्रति संलग्न करेंगे । राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर से अर्हकारी परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों को प्रव्रजन प्रमाण-पत्र संलग्न करने की जरूरत नहीं है ।
  • अर्हकारी परीक्षा की अंकतालिका की इस प्रति का निदेशक, शैक्षणिक परिसर द्वारा मूल प्रति से सत्यापन के बाद ही नामांकन प्रक्रिया पूर्ण होगी ।
  • पाठ्यक्रम पूरा होने के बाद, आवेदन किए जाने पर विश्वविद्यालय प्रव्रजन प्रमाण-पत्र जारी करेगा ।
  • विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की बायोमैट्रिक उपस्थिति दर्ज की जाती है ।
  • विद्यार्थियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपनी सभी कक्षाओं में नियमित रूप से उपस्थित हों ।
  • कक्षाओं और उससे जुड़े प्रायोगिक / फ़ील्ड कार्य में विद्यार्थियों की न्यूनतम 75% उपस्थिति अनिवार्य है ।
  • इससे कम उपस्थिति होने पर विद्यार्थी को आंतरिक परीक्षा और सैमेस्टर के अंत में होने वाली मुख्य परीक्षा में प्रविष्ट होने से रोक दिया जाएगा ।
  • विशेष परिस्थितियों में राजस्थान विश्वविद्यालय में प्रचलित नियमों के अनुरूप विद्यार्थियों को न्यूनतम उपस्थिति में छूट दी जा सकती है ।
  • विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों से अपेक्षा की जाती है कि वे सद्-व्यवहार के मानकों का पालन करें ।
  • विश्वविद्यालय परिसर में विद्यार्थी सदैव अपना परिचय-पत्र साथ रखेंगे ।
  • विश्वविद्यालय परिसर पूर्णतः रैगिंग-मुक्त है । इस संबंध में कार्रवाई के लिए विश्वविद्यालय ने एंटी-रैगिंग समिति का गठन किया है । कोई भी भयातुर विद्यार्थी इस समिति तक अपनी शिकायत पहुँचा सकता है । शिकायत पर तुरंत कार्रवाई की जाती है। न केवल परिसर में, परिसर से बाहर भी यदि कोई विद्यार्थी रैगिंग में लिप्त पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई किए जाने का प्रावधान है । विद्यार्थियों में मेल-जोल हो, मगर समिति यह सुनिश्चित करेगी कि रैगिंग का माहौल कतई न बने ।
  • प्रत्येक विद्यार्थी को प्रवेश के समय अपने अभिभावक / संरक्षक द्वारा विधिवत हस्ताक्षरित सहमति-पत्र लिखित रूप से प्रस्तुत करना होगा कि वह सत्रपर्यंत विश्वविद्यालय के नियमों और सद्-व्यवहार के मानकों का पालन करेगा ।
  • विश्वविद्यालय में आंतरिक शिकायत समिति का गठन किया गया है, जो परिसर में लैंगिक उत्पीड़न से जुड़े मामलों का निस्तारण करती है । इसकी रोकथाम के साथ ही समिति विद्यार्थियों में जेंडर संवेदनशीलता विकसित करने की सकारात्मक पहल भी करती है ।
  • इस प्रकार अकुंठित चित् विद्यार्थियों के स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करेगा ।
  • विद्यार्थी केंद्र सरकार / राज्य सरकार / अन्य एजेंसियों द्वारा प्रदान की जाने वाली छात्रवृत्तियों / वित्तीय मदद के हकदार हैं ।
  • यह हकदारी छात्रवृत्ति / वित्तीय मदद की संबंधित योजना के नियमों के अंतर्गत ही मान्य है ।
  • विश्वविद्यालय में सम्पूर्ण शुचिता के साथ परीक्षाओं का आयोजन किया जाता है ।
  • विश्वविद्यालय में संचालित सभी पाठ्यक्रमों में सैमेस्टर प्रणाली, चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम तथा ग्रेडिंग प्रणाली अपनाई गई है ।
  • सैमेस्टर के अंत में मुख्य परीक्षा प्रति वर्ष दिसंबर-जनवरी और मई-जून में आयोजित की जाती है ।
  • इससे पूर्व सतत मूल्यांकन के अंतर्गत आंतरिक परीक्षा भी ली जाती है, जिसमें उत्तीर्ण होने पर ही विद्यार्थी मुख्य परीक्षा में शामिल हो पाता है ।
  • परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन भरे जाते हैं । परीक्षार्थी अपने एडमिट कार्ड ऑनलाइन ही डाउनलोड करते हैं ।
  • परीक्षा परिणाम भी ऑनलाइन जारी किया जाता है ।

पाठ्य-योजना

स्नातक पाठ्यक्रम

यह पाठ्यक्रम तीन वर्ष की अवधि का होगा। इसमें विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों की ज़रूरी जानकारी मुहैया कराने के साथ जनसंचार और मास मीडिया के विभिन्न आयामों का शिक्षण और प्रशिक्षण दिया जाएगा । इस अध्ययन योजना में परंपरागत प्रिंट मीडिया के साथ रेडियो-टीवी, फ़ोटोग्राफ़ी, वैब/ऑनलाइन मीडिया, सोशल मीडिया, मीडिया प्रबंधन, विज्ञापन व लोक-संपर्क आदि की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। समाचार, संचार और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नवाचार पाठ्यक्रम में बुनियादी रूप से शरीक किए गए हैं।

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शोध (पीएच-डी)

सत्र 2020-21 से मीडिया स्‍टडीज और इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया विभागों के अंतर्गत पीएच-डी का अध्ययन होगा। प्रवेश विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों के अनुसार एक परीक्षा के माध्‍यम से दिए जाएँगे। किसी भी विषय में स्नातकोत्तर (पीजी) किए अभ्यर्थी प्रवेश परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।

इस पाठ्यक्रम का उद्देश्‍य पत्रकारिता और जनसंचार के क्षेत्र में उपलब्ध तथ्यों और जानकारी के विवेचन के साथ मौलिक संधान को बढ़ावा देना है। मीडिया के क्षेत्र (इंडस्‍ट्री) और उसकी अकादमिक शाखाओं में गहन अध्‍ययन की रुचि रखने वालों को यह शोध-पाठ्यक्रम नई संभावनाएँ प्रदान करेगा।

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