मुख्य पटल एमए-जेएमसी: सोशल मीडिया और ऑनलाइन पत्रकारिता

एमए-जेएमसी: सोशल मीडिया और ऑनलाइन पत्रकारिता

पिछले एक दशक में दुनिया में और भारत में भी सोशल मीडिया संवाद, सूचना और नैटवर्किंग के एक शक्तिशाली प्‍लेटफॉर्म के रूप में उभरा है। आम जन के अलावा विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों और कार्यकर्ताओं, लेखकों-पत्रकारों, समाजशास्त्रियों, नेताओं, अभिनेताओं, खिलाड़ियों आदि ने और उद्योग-व्यवसाय के साथ संस्थाओं और समूहों ने ब्लॉग, पॉडकास्ट, फेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, यूट्यूब, वॉट्सऐप, स्नैपचैट आदि प्लेटफॉर्म्स को अपनी अभिव्यक्ति और संवाद-संपर्क का माध्यम भी बनाया है।

नए डिजिटल माध्यमों ख़ासकर सोशल मीडिया ने संचार के लोकतंत्रीकरण के साथ नागरिकों के सशक्तीकरण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसने उन समुदायों को भी अभिव्यक्ति का अवसर दिया है जिनकी आवाज़ मुख्यधारा के मीडिया में कम या नहीं सुनाई देती थी। इन नए डिजिटल माध्यमों के कारण नागरिकों के लिए सरकार और प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित करना संभव हुआ है। दूसरी ओर, इन नए डिजिटल माध्यमों के कारण शासन और प्रशासन भी नागरिकों की आवाज़ के प्रति ज्यादा संवेदनशील हुए हैं।

नए माध्यमों में इंटरनेट या वैब आधारित ऑनलाइन पत्रकारिता ने आज अलग अहमियत हासिल कर ली है। इस माध्यम ने प्रिंट ही नहीं, रेडियो और टीवी के समक्ष भी एक असरदार चुनौती उपस्थित की है। दुनिया के अनेक विकसित देशों में सोशल मीडिया और ऑनलाइन समाचार माध्यम आमलोगों के लिए सूचना और समाचार के प्राथमिक माध्यम हो गए हैं। भारत जैसे विकासशील देश में भी यह प्रवृत्ति जोर पकड़ रही है। कम साधनों में समाचार पोर्टल, वैब पत्रिकाएँ, अखबारों, न्यूज चैनलों और मीडिया संगठनों की वैबसाइट ऑनलाइन संस्करण और यूट्यूब चैनल आदि तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं।

इसके कारण पत्रकारिता के तौर-तरीकों में भी काफी बदलाव आए हैं। नए डिजिटल माध्यमों में पारम्परिक माध्यमों के समाहित होते जाने के कारण पत्रकारिता में प्रिंट, प्रसारण और डिजिटल के बीच का फर्क बेमानी-सा होता जा रहा है। समाचार-कक्षों का एकीकरण हो रहा है, सम्पादकीय टीम की भूमिकाएं बदल रही हैं और तकनीकी कौशल की मांग बढ़ रही है। हालाँकि पत्रकारिता के बुनियादी सिद्धांत, नैतिक मूल्य और सामाजिक भूमिकाओं में कोई बदलाव नहीं आया है लेकिन नए डिजिटल माध्यमों के कारण समाचारों के संग्रह, संपादन और प्रस्तुति में निश्चय ही बड़े बदलाव आए हैं। मल्टी-मीडिया समाचार प्रस्तुति पर जोर बढ रहा है। मोबाइल पत्रकारिता (मोजो) एक नई विधा के रुप में भर रही है।

लेकिन नए डिजिटल माध्यमों खासकर सोशल मीडिया और सोशल मैसेजिंग - वॉट्सऐप, टेलिग्राम आदि ने जहाँ एक ओर संचार और मीडिया के दायरे का लोकतंत्रीकरण किया है, वहीं निहित स्वार्थी तत्त्वों ख़ासकर राजनीतिक समूहों और ट्रोल्स के लिए स्पेस मुहैया करा दी है, जो उसका इस्तेमाल अफवाहें, झूठी ख़बरें और नफरत फ़ैलाने के लिए कर रहे हैं। इसने न सिर्फ सार्वजनिक फलक को पेचीदा बना दिया है बल्कि समाज और सरकारों के सामने सामाजिक सौहार्द, शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी चुनौती पैदा कर दी है। लेकिन अच्छी बात यह है कि डिजिटल माध्यमों ने दुष्प्रचार और झूठ के मुकाबले के लिए उसकी जांच करने वाले "फैक्टचैकर्स" की एक नई विधा और पौध भी पैदा कर दी है।

सूचना तकनीक में क्रांति और विस्तार के साथ मीडिया परिदृश्य में आए इन बदलावों और उससे पैदा हुई जरूरतों ने मीडिया और मीडियाकर्मियों के लिए अभिव्यक्ति और रोज़गार के अनेक नए अवसर पैदा किए हैं। इस धारा में आगे और नए डिजिटल माध्यम सामने आएंगे। इनके लिए नए माध्यमों की गहरी समझ और तकनीकी कौशल का ज्ञान जरूरी है। इसी प्रयोजन से सोशल मीडिया और ऑनलाइन पत्रकारिता में यह स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम तैयार किया गया है।

हमारी शिक्षण पद्धति ज्ञान और कौशल को बढ़ावा देती है। हमारा प्रयास तकनीकी और पेशेवर शिक्षा के साथ पत्रकारिता के बुनियादी सिद्धांतों और मूल्यों, मीडिया कानून और आचार-संहिता आदि के बारे में विद्यार्थियों में समालोचनात्‍मक समझ विकसित करना है। इस पाठ्यक्रम में विद्यार्थी लेखन और संपादन के साथ ही तकनीकी प्रस्तुतीकरण भी सीख सकेंगे। मीडिया व्यवसाय, स्वामित्व, प्रबंधन, उद्यमिता, जनसंपर्क, विज्ञापन, सोशल मीडिया इंगेजमेंट और मार्केटिंग का अध्ययन भी इस पाठ्यक्रम के मुख्य आकर्षण हैं। यह पाठ्यक्रम छात्रों को नए माध्यमों में पारंगत होने की क्षमता ही नहीं प्रदान करता, बल्कि अपने मीडिया उद्यमों की संभावनाएँ खोजने और उन्हें क्रियान्वित करने के लिए भो प्रेरित करता है।

स्तर: स्नातकोत्तर

अवधि: दो वर्ष, चार सैमेस्टर

क्रेडिट: 120

सीट संख्या: 30

शैक्षणिक अर्हता: मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक उपाधि